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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
वैश्विक बाज़ार में हिंदी की उपयोगिता
Authors
प्रिंस गुप्ता
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र वैश्विक बाज़ार में हिंदी की उपयोगिता का बहुआयामी अध्ययन
प्रस्तुत करता है। इसमें भाषा, बाज़ार, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक
संवाद के बीच के संबंधों को परिभाषित करने का प्रयास किया गया है। हिंदी, वर्तमान में लगभग 55 करोड़ से अधिक लोगों की मातृभाषा
है तथा विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। यही कारण है कि
वैश्विक बाज़ार में हिंदी भाषा अपनी उपयोगिता के नए आयाम स्थापित कर रही है। भारत
की वैश्विक उपस्थिति, प्रवासी समुदायों की निरंतर बढ़ती संख्या,
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों पर हिंदी सामग्री की वृद्धि और अर्थव्यवस्था
में हिंदी के उदय ने इसे विपणन, तकनीक, कला, शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय नीति का महत्वपूर्ण
घटक बना दिया है। आर्थिक दृष्टि से ग्राहक सेवा, विपणन और रोजगार के क्षेत्रों में
हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सांस्कृतिक दृष्टि से यह कला, साहित्य, फिल्मों और सामाजिक पहचान का सशक्त माध्यम है। वहीं तकनीकी
परिदृश्य में हिंदी का डिजिटल विस्तार और एआई-उन्मुख भाषा नवाचार इसे वैश्विक
संवाद का हिस्सा बनाते हैं। हिंदी निरंतर वैश्विक उपयोगिता का विस्तार कर रही है
और भविष्य में यह और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।
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Pages:259-261
How to cite this article:
प्रिंस गुप्ता "वैश्विक बाज़ार में हिंदी की उपयोगिता". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 259-261
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