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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
हर हाल बेगाने में’ स्त्री जीवन के विभिन्न पहलू
Authors
Sajitha P C, Dr. P Geetha
Abstract
समाज में स्त्री का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वह माता, बहन, पुत्री और बहू जैसे विभिन्न रूपों में परिवार तथा समाज को जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी के रूप में कार्यरत है। स्त्री केवल परिवार की संरचना को बनाए रखने में ही नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों, संस्कारों और परंपराओं को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्त्री की स्थिति, उसका कार्यक्षेत्र तथा उसकी सीमाएँ समाज के विभिन्न वर्गों में भिन्न-भिन्न रूपों में दिखाई देती हैं। कहीं वह परंपराओं और रूढ़ियों से बंधी हुई दिखाई देती है, तो कहीं वह शिक्षा और जागरूकता के कारण स्वतंत्र और सशक्त रूप में सामने आती है। आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियाँ भी स्त्री की स्थिति को प्रभावित करती हैं। साहित्य में भी समय-समय पर स्त्री जीवन के इन विभिन्न रूपों और स्थितियों का चित्रण किया गया है। साहित्यकारों ने अपने अनुभव और सामाजिक यथार्थ के आधार पर स्त्री की बदलती भूमिका, उसकी समस्याओं, संघर्षों और उपलब्धियों को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया है। इस प्रकार साहित्य समाज में स्त्री की वास्तविक स्थिति को समझने और उसे नई दृष्टि से देखने का महत्वपूर्ण माध्यम बन जाता है।
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Pages:262-265
How to cite this article:
Sajitha P C, Dr. P Geetha "हर हाल बेगाने में’ स्त्री जीवन के विभिन्न पहलू". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 262-265
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