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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
एस. आर. हरनोट की आंचलिक कहानियों में स्त्री चेतना
Authors
अकबरअली शेख, डॉ. ब्रिजपाल सिंह गहलोत
Abstract
अंचल, आंचलिक या आंचलिकता शब्द सुनते ही हमारा ध्यान ‘मैला आँचल’ उपन्यास, मेरीगंज गाँव तथा बिहार के ग्रामीण अंचलों की ओर जाता है। तब से लेकर अब तक आंचलिकता और मेरीगंज पर्याय बन गए हैं, जबकि आंचलिकता का क्षेत्र अत्यंत व्यापक और विस्तृत है। इसके पीछे प्रमुख कारण हैकृ फणीश्वरनाथ रेणु। इनकी लेखनी ने पाठकों को इतनी गहराई से प्रभावित किया कि आंचलिकता का व्यापक धरातल धीरे-धीरे बिहार और उसके आस-पास के क्षेत्रों का ही पर्याय बनकर रह गया है। वास्तव में, आंचलिक रचना देश के किसी भी क्षेत्र को आधार बनाकर लिखी जा सकती है जो अपनी एक अलग पहचान रखता हो।
समकालीन दौर में एस. आर. हरनोट आंचलिक कथाकारों में अग्रणीय हैं। जिन्होंने हिमाचल प्रदेश के अंचलों को आधार बनाकर अंचलों में छिपी संस्कृति, भाषा एवं लोक जीवन का सजीव चित्रण किया है। इसी आंचलिक धरातल पर वे आंचलिक विसंगतियों एवं विडंबनाओं को उभारते हैं जो समय मानवता का प्रतीक बन जाता है। जातिगत भेदभाव, स्थानीय राजनीति, अंधविश्वास, अशिक्षा, पिछड़ापन तथा स्त्री समस्या जैसे प्रश्न इनके कथा साहित्य के केंद्र में हैं। इनमें हरनोट के कथा साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण आयाम स्त्री जीवन एवं उनका संघर्ष है। पारंपरिक स्त्री पात्रों के विपरीत, इनके नारी पात्र केवल करुणा या सहानुभूति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपने अस्तित्व और अस्मिता के लिए संघर्ष करने वाली सशक्त व्यक्तित्व के रूप में उभरती हैं।
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Pages:280-282
How to cite this article:
अकबरअली शेख, डॉ. ब्रिजपाल सिंह गहलोत "एस. आर. हरनोट की आंचलिक कहानियों में स्त्री चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 280-282
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