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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
अकेली आवाज उपन्यास में अकेलापन का चित्रण : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन।
Authors
डॉ. सांटी जोसफ
Abstract
मनुष्य के जीवन का सबसे सुखद काल बचपन होता है। यह माता -पिता और भाई -बहनों के साथ, बिना किसी जिम्मेदारी और तनाव के,हँसते -खेलते बिताने का समय है। पर्याप्त आराम, पौष्टिक आहार,खेलकूद और खुशियों से भरा समय। पाठ्यपुस्तकों का बोझ, होमवर्क का सिरदर्द या सिलेबस का अत्यधिक दबाव न होने का समय। बचपन में हमें जो आदतें मिलती हैं,वही आगे के जीवन में हमारा मार्गदर्शन करती हैं। “अकेली आवाज “में बंटू के कोई भाई -बहन नहीं थे। उसके पिता हमेशा काम में व्यस्त रहते थे। बारह वर्ष की आयु तक वह बिलकुल अकेला रहा। न कोई भाई -बहन,न कोई दोस्त और न ही कोई सहपाठी। इस तरह वह बचपन में पूरी तरह अकेला पड़ गया। चार -पांच साल की उम्र से लेकर बारह साल की उम्र तक केवल एक ही अध्यापिका उसके साथ थीं। उनके आलावा उसने केवल अपनी माँ और कुछ नौकरों को ही देखा और उनसे बातचीत की। यहां तक कि वह सही और गलत के बीच अंतर भी नहीं पहचान पाता था। हालाँकि नीता मिस ने उसे सही और गलत के बारे में बताया था,लेकिन उसमें इसे समझने का विवेक विक्सित नहीं हो पाया। यह भी उसके इसी अकेलेपन का परिणाम है। लेकिन बचपन में उसने जो दोस्ती खोई थी,वह उसे आदर्श विद्यालय में पहुंचने पर मिल जाती है।
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Pages:14-17
How to cite this article:
डॉ. सांटी जोसफ
"अकेली आवाज उपन्यास में अकेलापन का चित्रण : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन।". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 14-17
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