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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
हिंदी विज्ञान कहानियों में पर्यावरण चिंतन की अवधारणा का अध्ययन
Authors
कविता लिटौरिया, डॉ0 के0 सी0 जैन
Abstract
हिंदी विज्ञान कहानियाँ (साइंस फिक्शन) पर्यावरणीय मुद्दों को गहनता से उजागर करती हैं, जहाँ जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, परमाणु युद्ध के दुष्परिणाम, जनसंख्या विस्फोट, कीटनाशकों का प्रभाव और संसाधनों की कमी जैसे विषय प्रमुख हैं। यह शोध पत्र समकालीन हिंदी विज्ञान कथा लेखकों जैसे अरविंद मिश्र, देवेंद्र मेवाड़ी, शुकदेव प्रसाद, मनोहर श्याम जोशी और अन्य की रचनाओं का विस्तृत विश्लेषण करता है। इन कहानियों में पर्यावरण चिंतन मानव-प्रकृति संबंधों की जटिलताओं को दर्शाता है, जो वैश्वीकरण, औद्योगीकरण और तकनीकी प्रगति के दुष्परिणामों पर टिप्पणी करता है। अध्ययन से पता चलता है कि हिंदी विज्ञान कथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम है, जो न केवल समस्या का चित्रण करता है बल्कि भविष्य की चेतावनी भी देता है।
इस पत्र में पर्यावरण चिंतन को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों में समझा गया है, जिसमें प्राचीन भारतीय दर्शन से लेकर आधुनिक वैश्विक चुनौतियों तक का समावेश है। समकालीन कहानियाँ पर्यावरण को एक जीवंत प्राणी के रूप में चित्रित करती हैं, जो मानवीय लालच और अज्ञानता से पीड़ित है। उदाहरणस्वरूप, प्रदूषित शहरों, मरते पक्षियों और परमाणु तबाही के माध्यम से लेखक पाठकों को आत्मनिरीक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। यह विमर्श नारी विमर्श, सामाजिक न्याय और तकनीकी नैतिकता से भी जुड़ता है, क्योंकि पर्यावरणीय संकट सबसे अधिक वंचित वर्गों को प्रभावित करता है। शोध से निष्कर्ष निकलता है कि हिंदी विज्ञान कथा पर्यावरणीय न्याय की मांग करती है और सतत विकास के मॉडल को बढ़ावा देती है।

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Pages:33-35
How to cite this article:
कविता लिटौरिया, डॉ0 के0 सी0 जैन "हिंदी विज्ञान कहानियों में पर्यावरण चिंतन की अवधारणा का अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 33-35

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