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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
शोध-पत्र का शीर्षक: डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के उपन्यासों में राष्ट्रीय चेतना
Authors
शुभांगी माथुरे
Abstract
यह शोध-पत्र डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के उपन्यासों में निहित राष्ट्रीय चेतना का गहन विश्लेषण करता है। समकालीन हिंदी साहित्य और राजनीति में समान रूप से सक्रिय 'निशंक' जी ने अपने कथा-साहित्य में भारतीय समाज के यथार्थ, मानवीय मूल्यों और राष्ट्र-निर्माण की भावना को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। उनके उपन्यास ‘मेजर निराला’, ‘बीरा’, ‘पल्लवी’ और ‘छूट गया पड़ाव’ में देशप्रेम, सैनिक जीवन की शौर्यगाथा, सामाजिक विसंगतियों का चित्रण तथा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
इस अध्ययन का उद्देश्य उनके उपन्यासों में राष्ट्रीय भावना के विविध आयामों को उजागर करना है—जहाँ एक ओर सैनिकों के बलिदान और साहस को राष्ट्र की अस्मिता से जोड़ा गया है, वहीं दूसरी ओर पर्वतीय समाज की स्त्री-जीवन, सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक समरसता को राष्ट्रीय चेतना का आधार माना गया है। शोध-पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि 'निशंक' जी का साहित्य जातिवाद, क्षेत्रवाद और सांप्रदायिकता से ऊपर उठकर अखंड भारत की कल्पना करता है।
डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के उपन्यास केवल साहित्यिक कृतियाँ नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय समाज के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय एकता के जीवंत दस्तावेज हैं। उनका साहित्य पाठकों में अपनी जड़ों के प्रति गौरव और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य-बोध जगाने का कार्य करता है, जिससे राष्ट्रीय चेतना एक व्यापक मानवीय और सांस्कृतिक विमर्श का रूप ले लेती है।

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Pages:59-60
How to cite this article:
शुभांगी माथुरे "शोध-पत्र का शीर्षक: डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के उपन्यासों में राष्ट्रीय चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 59-60

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