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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
स्त्री-विमर्श सम्बन्धी चिंतन और हिंदी साहित्य
Authors
दिपाली गंगवार
Abstract
स्त्री-विमर्श की वैचारिकी वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक होती जा रही है, जिसमें स्त्री अस्मिता के प्रश्नों को यथार्थ की कसौटी पर रखते हुए विमर्श चिंतकों ने मूल्यांकन करते हुए पाया कि इसकी जड़े तत्कालिक न होकर आदिकालीन हैं। जिसमें विभिन्न विख्यात एव्ं आविख्यात रचनाकारों ने स्त्री विमर्श के प्रश्नों के जवाब अपने अनुकूलता के अनुरूप दिये हैं, लेकिन आधुनिक काल में आकर पाश्चात्य स्त्री चिंतको की वैचारिकी ने स्त्री चिंतन को नया आधार प्रदान किया जिसके माध्यम से हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श के आलोचकों और रचनाकारों ने भारतीय स्त्री की स्थिति और दशा को वास्तविक रूप में प्रकट किया, जिसके कारण हिंदी कथा साहित्य और कविता की विधा धनी हुई है, वस्तुतः अब हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श को एक आधार मिल चुका है लेकिन अभी भी स्त्री विमर्श के कुछ प्रश्न यथावत बने हुए हैं, जिन पर विचार विमर्श करने की और साथ ही अब तक के स्त्री चिंतन को पुनः आधुनिक स्थितियों की कसौटियों पर देखने आवश्यकता है।
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Pages:55-58
How to cite this article:
दिपाली गंगवार "स्त्री-विमर्श सम्बन्धी चिंतन और हिंदी साहित्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 55-58
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