Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
समाज और मनुष्य के संघर्ष का काव्यः केदारनाथ अग्रवाल
Authors
रेवन्त राम
Abstract
प्रगतिवादी केदारनाथ अग्रवाल, जनकवि है, वे जनमानस के अटूट विश्वास और जीवन मूल्यों पर आधारित कविताओं के संवाहक है। केदारजी मानते हैं कि लेखक या कवि समाज से जुड़ा होता है। यह सामाजिक प्रतिबद्वता ही लेखक की चेतना को परंपरा की रूढ़ियों से अलग करती है। लेखक की वैचारिक अभिव्यक्ति की वैयक्तिक स्वतंत्रता भी अहंवादी प्रवृतियों का खण्डन करती है। तभी लेखक जनजीवन से जुड़ाव पैदा कर पाता है।
केदारनाथ अग्रवाल की कविता, मनुष्य वे स्वाधीनता परक मूल्यों की समर्थक है। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से श्रमजीवी, शोषित और दमित वर्गों के हितों की लड़ाई लड़ी है। उनकी कविताओं में प्रकृति स्वतंत्र रूप से उपस्थित है। केन नदी तो उनके मानवीय जीवन का संगम स्थल रही है।
केदारनाथ अग्रवाल की कविता, स्त्री विमर्श का जीवन्त दस्तावेज है। उनकी कविता समाज में स्त्री को गरिमा प्रदान करती है, उनके संघर्षों और श्रम को प्रतिष्ठापित करती है। उनकी कविताओं में स्वस्थ स्त्री-प्रेम दिखायी देता है।
समग्र रूप में, व्यापक संदर्भों के परिप्रेक्ष्य में, केदारनाथ अग्रवाल की कविता में उनकी प्रगतिशील विचारधारा और श्रमिक-जनवादी दृष्टिकोण को दर्शाती है। जिसमें समतामूलक समाज की स्थापना उनका परम आदर्श है।

Download
Pages:105-107
How to cite this article:
रेवन्त राम "समाज और मनुष्य के संघर्ष का काव्यः केदारनाथ अग्रवाल". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 105-107

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.