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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
अध्यात्म कल्पद्रुम एवं अष्टावक्र गीता : एक परिचयात्मक अध्ययन
Authors
साध्वी समृद्धि, डा. मैथिली प्र. राव
Abstract
भारतीय दार्शनिक परंपरा में आत्मा, संसार और मुक्ति से संबंधित चिंतन अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रहा है। विभिन्न दार्शनिक धाराओं ने आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया को अलग-अलग दृष्टियों से समझाया है। जैन परंपरा का अध्यात्म कल्पद्रुम तथा अद्वैत वेदांत की परंपरा का अष्टावक्र गीता ऐसे दो महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं जो आत्मज्ञान और मोक्ष के मार्ग का विशद प्रतिपादन करते हैं। प्रस्तुत शोधपरक आलेख में इन दोनों ग्रंथों का परिचयात्मक तथा तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि दोनों ग्रंथों का मूल लक्ष्य आत्मज्ञान की प्राप्ति है, किंतु उनकी दार्शनिक पद्धति और आध्यात्मिक साधना की प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण भिन्नताएँ भी हैं।
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Pages:119-120
How to cite this article:
साध्वी समृद्धि, डा. मैथिली प्र. राव "अध्यात्म कल्पद्रुम एवं अष्टावक्र गीता : एक परिचयात्मक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 119-120

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अध्यात्म कल्पद्रुम एवं अष्टावक्र गीता : एक परिचयात्मक अध्ययन | International Journal of Hindi Research