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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
राधाकृष्ण: साहित्यिक संवेदना से सांस्कृतिक चेतना तक
Authors
पुनीता कुमारी श्रीवास्तव
Abstract
इस शोध आलेख में हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण रचनाकार “राधाकृष्ण” के साहित्यिक व्यक्तित्व और उनके बहुआयामी योगदान का अध्ययन किया गया है। “राधाकृष्ण” ने अपने लेखन के माध्यम से समाज के सामान्य, वंचित और संघर्षशील लोगों के जीवन को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, मानवीय संबंधों, सामाजिक विषमता और आम व्यक्तियों की समस्याओं का सहज तथा यथार्थ चित्रण मिलता है। झारखण्ड के जनजीवन, वहाँ की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक परिवेश को हिंदी साहित्य में पहचान दिलाने में उनका इनका बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मगर सोचने वाली बात ये है कि ऐसे साहित्यकार को बहुत कम ही याद किया जा रहा है और इनपर शोध भी बहुत कम ही हुए है। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनको राधाकृष्ण के बारे में कोई जानकारियां ही नहीं है।
“राधाकृष्ण” केवल साहित्यकार ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने तो पत्रकारिता और संपादन कार्य को भी पूरे निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ पूरा किया। पत्रकारिता को उन्होंने केवल अपने विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि उसे तो समाज और साहित्य को जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनाया। संपादक के रूप में भी उन्होंने साहित्यिक और सामाजिक विषयों को उचित स्थान देकर नए विचारों और रचनाकारों को आगे आने का अवसर दिया। इस शोध आलेख में उनके प्रमुख रचनाओं, यथार्थवादी शैली, साहित्यिक दृष्टि, पत्रकारिता तथा संपादकीय कार्यों का अध्ययन करते हुए हिंदी साहित्य में उनके विशेष योगदान को समझने का एक मूलभूत प्रयास किया गया है। “राधाकृष्ण” का साहित्य आज भी सामाजिक संवेदना और मानवीय मूल्यों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
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Pages:155-158
How to cite this article:
पुनीता कुमारी श्रीवास्तव "राधाकृष्ण: साहित्यिक संवेदना से सांस्कृतिक चेतना तक". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 155-158
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