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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
डॉ. शरद सिंह की कहानियों में व्यक्त विद्रोही नारी जीवन
Authors
डॉ. सुखदेव रामा पाटील
Abstract
आधुनिक हिंदी कथा लेखन में डॉ. शरद सिंह का नाम आज प्रमुख लेखिकाओं में लिया जाता है। नारी जीवन की नब्ज को टटोलकर और उसे भारतीय समाज के परिप्रेक्ष्य के साथ पाश्चिमात्य संस्कृति का असर किस तरह हो रहा है इसका यथार्थ अंकन उन्होंने अपने कहानियों में किया है। नारी शोषण, नारी संवेदना, नारी विद्रोह, नारी उपेक्षा, नारी का मानसिक द्वंद्व और रिश्तों के परिप्रेक्ष्य में नारी जैसे नारी जीवन से जुडे आयाम उनके कथा साहित्य में परिलक्षित होते हैं। स्वंय नारी होने के कारण उन्होंने नारी जीवन भोगा है, जिया है। खुद की अनुभूति और सामाजिक अनुभूति के आधार पर उन्होंने बेबाक तरीके से नारी जीवन को रेखांकित करते हुए नारी के विद्रोह को सामने लाया है। श्तीली तीली आगश्, श्बाबा फरीद अब नहीं आतेश्, श्छिपी हुई औरत और अन्य कहानियाँश् और श्राख तेरे अंगराश् आदि कहानियों में भी नारी का जीवन केंद्र में दिखाई देता है। भारतीय समाज और भारतीय नारी के परिप्रेक्ष्य में विद्रोही नारी जीवन का अध्ययन हमने श्बाबा फरीद अब नहीं आतेश् इस कहानी संग्रह द्वारा रेखांकित किया है।
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Pages:144-146
How to cite this article:
डॉ. सुखदेव रामा पाटील "डॉ. शरद सिंह की कहानियों में व्यक्त विद्रोही नारी जीवन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 144-146
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