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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
हरियाणा के समकालीन हिंदी साहित्य में युवा पीढ़ी की समस्याएँ
Authors
पूनम, डॉ. रेणुका
Abstract
समकालीन हिंदी साहित्य अपने समय के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों को अभिव्यक्त करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। हरियाणा का हिंदी साहित्य भी बदलते सामाजिक परिवेश, ग्रामीण जीवन, आधुनिकता, शिक्षा, रोजगार, परिवार, लैंगिक संबंधों तथा सांस्कृतिक संक्रमण को निरंतर अभिव्यक्त करता रहा है। वर्तमान समय में युवा पीढ़ी अनेक प्रकार की समस्याओं से जूझ रही है। बेरोजगारी, रोजगार की असुरक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, प्रवासन, पारिवारिक अपेक्षाएँ, सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता, नशे की प्रवृत्ति, डिजिटल माध्यमों का प्रभाव, प्रेम एवं वैवाहिक संबंधों में परिवर्तन तथा पहचान और भविष्य को लेकर असुरक्षा इनमें प्रमुख हैं। हरियाणा के ग्रामीण युवाओं के संदर्भ में रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में शहरों तथा विदेशों की ओर प्रवासन भी महत्वपूर्ण सामाजिक यथार्थ है। उपलब्ध अध्ययनों में हरियाणा के ग्रामीण युवाओं के प्रवासन के प्रमुख कारणों में रोजगार की कमी, कम आय तथा बेहतर अवसरों की तलाश सामने आती है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य हरियाणा के समकालीन हिंदी साहित्य में युवा पीढ़ी की समस्याओं के चित्रण का आलोचनात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन में साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न मानकर सामाजिक यथार्थ के दस्तावेज के रूप में देखा गया है। साथ ही यह भी विश्लेषित किया गया है कि समकालीन साहित्य युवा पीढ़ी की समस्याओं को किस प्रकार अभिव्यक्त करता है तथा उनके समाधान की संभावनाओं की ओर संकेत करता है।
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Pages:170-172
How to cite this article:
पूनम, डॉ. रेणुका "हरियाणा के समकालीन हिंदी साहित्य में युवा पीढ़ी की समस्याएँ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 170-172
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