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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
डा० सूर्यपाल सिंह के नाट्य साहित्य में राष्ट्रीय चेतना
Authors
डॉ प्रकाश चन्द्र गिरि, जगदीष यादव
Abstract
राष्ट्रीय चेतना डा० सिंह के साहित्य में मानूव स्वभाव एवं पर्यावरण के सम्बन्धो तथा मानवीय गुणों के ब्यावहारिक प्रदर्शन एवं कार्य तथा महात्वाकांक्षाओं के साथ ही साथ राष्ट्रीय चेतना की भावना का स्वर एवं विकास अपने उच्चसोपान पर है। वह राष्ट्र के नागरिको के कर्तव्यों द्वारा निर्वहन किया जाता है। यह राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान कर देने वाले अधिकार एवं आधुनिक कार्यों आचरणों तथा विचारों द्वारा राष्ट्रीय कविता की अलख जगाने वाले महापुरुओं के वर्ण गाथाओं एवं अकी भूमिकाओं का वर्णन कर अपने साहित्य साहित्य के माध्यम से जन-मानस के समक्ष उनके महत्व को प्रस्तुत करना डा सिंह के राष्ट्रीय चेतना बादी साहित्यकार होने का प्रमाण है मिलता है। इन बिन्दुओं एवं प्रसंगों के माध्य से इनका वर्णन किया जा सकता है।
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Pages:159-160
How to cite this article:
डॉ प्रकाश चन्द्र गिरि, जगदीष यादव "डा० सूर्यपाल सिंह के नाट्य साहित्य में राष्ट्रीय चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 159-160
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