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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
युवा पीढ़ी और वंदे मातरम: वर्तमान परिप्रेक्ष्य
Authors
डॉ कमल सैनी, सुन्दर रानी
Abstract
आज की श्युवा पीढ़ीश् तकनीकी- नवाचार, अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और पारंपरिक व आधुनिक सिद्धांतो से संपन्न हैं। जोकि मानवतावाद, एकजुटता, विष्व बंधुत्व, सार्वभौमिक न्याय और सर्वजन हिताय पर विष्वास रखते हैं। युवाओं में वंदे मातरम के अर्थ पर सबसे बड़ा प्रभाव शिक्षा और संस्कृति का है। स्कूलों में राष्ट्रगान और वंदे मातरम का पाठ देशभक्ति, निष्ठा और अनुशासन के साथ जोड़कर सिखाया जाता है। वंदे मातरमकृयह केवल दो शब्द नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी भावना है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन, राष्ट्रीय पहचान की गरिमा और मातृभूमि के प्रति असीम प्रेम का प्रतीक है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम ने लाखों युवाओं को अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध प्रतिरोध का मार्गदर्शक बनाया। हालांकि यह अभिव्यक्ति 19वीं और 20वीं सदी के राजनीतिक संघर्षों से जुड़ी है, पर आज जब हम इसे युवा पीढ़ी के संदर्भ में देखते हैं, तो इसकी व्याख्या, भावना और उपयोग के मायने समय के साथ बदल चुके हैं। यह आलेख वर्तमान परिप्रेक्ष्य से यह समझने का प्रयास करेगा कि आधुनिक युवा वंदे मातरम को कैसे ग्रहण करते हैं, किन चुनौतियों और समीकरणों से गुजरते हुए यह प्रतीक उनके जीवन में प्रासंगिक है, और किस तरह से यह भावनात्मक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक विमर्शों के बीच जुड़ा हुआ है। वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए वंदे मातरम का क्या अर्थ है? क्या यह गीत उनके लिए केवल इतिहास की पुस्तकों में दर्ज एक धरोहर है, या यह आज भी उनकी चेतना को झकझोरने की क्षमता रखता है? क्या डिजिटल युग की तेज रफ्तार जिंदगी में इस गीत की भावपूर्ण धुन युवाओं के कानों तक पहुंच पाती है?

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Pages:200-202
How to cite this article:
डॉ कमल सैनी, सुन्दर रानी "युवा पीढ़ी और वंदे मातरम: वर्तमान परिप्रेक्ष्य". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 200-202

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