Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 4 (2026)
चारण साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं साहित्यिक स्वरूप
Authors
सुन्दर दान, डॉ. कैलाश चंद सैनी
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र में राजस्थान की साहित्यिक परंपरा के महत्त्वपूर्ण अंग चारण साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं साहित्यिक स्वरूप का अध्ययन किया गया है। चारण परंपरा के प्राचीन उल्लेखों से लेकर मध्यकालीन राजस्थान में चारणों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक भूमिका के विकास को रेखांकित किया गया है। अध्ययन में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि चारण साहित्य को केवल वीरगाथात्मक साहित्य के रूप में देखना उसके व्यापक स्वरूप को सीमित करना होगा। इसमें वीरता, स्वाभिमान, वचनबद्धता, दानशीलता और राजपूती जीवन-मूल्यों के साथ नीति, भक्ति, लोकजीवन, सामाजिक संबंध तथा मानवीय संवेदनाओं की भी अभिव्यक्ति हुई है।
शोध-पत्र में चारण साहित्य और डिंगल भाषा के पारस्परिक संबंध का विवेचन करते हुए डिंगल की ओजपूर्ण अभिव्यक्ति, भाषिक विशिष्टता तथा छंदगत विविधता को रेखांकित किया गया है। दोहा, सोरठा, गीत और छप्पय आदि काव्यरूपों के माध्यम से चारण कवियों ने वीरता, त्याग, स्वामीभक्ति और जीवन-मूल्यों को प्रभावशाली रूप में अभिव्यक्त किया। साथ ही, चारण साहित्य के इतिहास-बोध का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि इसमें तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन से संबंधित अनेक प्रसंग सुरक्षित हैं। हालांकि काव्यात्मक कल्पना, अतिशयोक्ति और भावात्मकता के कारण इसके ऐतिहासिक उपयोग में तुलनात्मक परीक्षण आवश्यक है।
अध्ययन से यह सामने आता है कि चारण साहित्य राजस्थान की सामूहिक स्मृति, वीर परंपरा, लोक-संस्कृति और सांस्कृतिक चेतना का महत्त्वपूर्ण साहित्यिक आधार है। इसका महत्त्व केवल इसकी प्राचीनता अथवा वीर-वर्णन में नहीं, बल्कि इसके भाषिक, साहित्यिक, सामाजिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान में भी निहित है।

Download
Pages:44-47
How to cite this article:
सुन्दर दान, डॉ. कैलाश चंद सैनी "चारण साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं साहित्यिक स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 4, 2026, Pages 44-47

Please enter the email address corresponding to this article submission.

चारण साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं साहित्यिक स्वरूप | International Journal of Hindi Research