ARCHIVES
VOL. 3, ISSUE 4 (2017)
वर्तमान परिवेश में नाथ साहित्य की प्रासंगिकता का अनुशीलन
Authors
डॉ0 सत्येंद्र प्रकाश
Abstract
वर्तमान वैश्विक समाज एक ओर तो सफलता के नित नए शिखर छू रहा है परन्तु दूसरी ओर यह समाज में फैली कुरीतियों, आर्थिक शोषण, भ्रष्टाचार, भूख-प्यास, गरीबी, रंगभेद, ऊँच-नीच की दुर्भावना आदि से भी अछूता नहीं हो सका है। अतः नाथों ने अपने समय के समाज के कल्याण के लिये जो कुछ कहा, वह आज के पतन की ओर प्रवृत्त समाज के लिये भी उपयोगी है। उनकी वाणियों की जितनी उपादेयता और प्रासंगिकता तत्कालीन समय में थी, उससे कहीं ज्यादा वर्तमान समय में है। यदि प्रत्येक व्यक्ति नाथों द्वारा निर्दिष्ट सत्य तथा दर्शन का आचरण करे तो वर्तमान समाज की अनेक समस्याओं का समाधान संभव हो सकता है। जन मानस के संताप को दूर करने वाली नाथों की पियूष्वर्षी वाणी का तत्कालीन समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा और उन्होंने आपनी वाणियों से आने वाली पीढ़ियों को अजस्र प्रेरणा प्रदान की। नाथों की वाणियाँ धार्मिक, जातीय पाखण्ड तथा शासकों के दमनचक्र के विरोध के परिणामस्वरूप कही गयी थी। आज भी यह भेदभाव, शोषण तथा शासकीय दमन चक्र खत्म नहीं हुआ है। वर्तमान शोषण एवं आतंक पर टिकी व्यवस्था का हर विरोधी नाथ कवियों की वाणियों एवं विचारों से ऊर्जा एवं प्रकाश ग्रहण करता है। नाथों की अपरिग्रह, इन्द्रिय-निग्रह, धन-वैभव की नश्वरता, सादा जीवन, संयमित जीवन, परोपकारिता, दया, भ्रातृत्व आदि की प्रेरणाप्रद वाणियाँ बहुत मौंजूद हैं, जिन्हें जीवन में आचरित करने से ही आर्थिक शोषण, भ्रष्टाचार, भूख-प्यास, गरीबी, ऊँच-नीच की दुर्भावना पर नियंत्रण किया जा सकता है और तभी मनुष्य मात्र का कल्याण सम्भव है।
माया बंधन से मुक्ति हेतु नाथों ने कहा है कि -
स्वामी जी कौण परचै माया मोह छुटे, कौण परचै शशि सूर फूटे।
कौण परचै लागे बंध, कौण परचै अजराबर कंध।।
अबधु मन परचै माया मोह छूटै, पवन परचै शशि घर फूटै।
कौण परचै लागै बंध, गुरू परचै अजरावर कंध।।
स्वामी जी कौण पेड़ बिन डाल, कौण पंख बिन सुआ।
कौण पाल बिन नार, कौण बिन कोल मुआ।।
अबधु पबन पेड़ बिन डाल, मन पंख बिन सुआ।
धीरज पाल बिन नार, निंद्रा बिन काल मुआ।।
Download
Pages:03-06
How to cite this article:
डॉ0 सत्येंद्र प्रकाश "वर्तमान परिवेश में नाथ साहित्य की प्रासंगिकता का अनुशीलन". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 4, 2017, Pages 03-06
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

