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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 3, ISSUE 6 (2017)
कालिदास के नाटको मे संवेदना और प्रेम
Authors
डाॅ0 सुशील कुमार तिवारी
Abstract
मानव को मानव के साथ सम्बन्ध जोडने को यहाॅ तक कि जगत के विविध जीवो के साथ मानवीय सम्बन्ध को बनाये रखने का यही संवेदना है।
मानवता को उन्होने सर्वोच्च स्थान दिया है और उसके प्रति अपनी आस्था प्रकट कि है उनकी कृतियो में दिव्य चरित्रो की चर्चा है किन्तु उन्होने उन्हे मानवीय भावनाओ से ही ओत प्रोत देखा है।
कालिदास मानव और देव मे विशेष अन्तर न मानते हुुए श्रोत-स्र्मात धर्म के अनुसार उनमें केवल इतना ही अन्तर मानते है कि पुण्यकर्मा मानव देव हो जाता है और क्षीण पुण्य पुनः मानव हो जाता है। जैसे उनके दुष्यन्त इन्द्र की सहायता के लिए गये। शकुन्तला देव और मानव के संयोग से उत्पन्न होते हुए निःसंकोच रुप से देवो के आश्रम मे रहती हुई अपने पुत्र का पालन करती रही।
इस प्रकार मानव देवो का दास न होकर उनकी समकक्षता प्राप्त कर सकता है यह प्रदर्शित कर कालिदास ने मानव के गौरव के प्रति अपनी आस्था प्रकट की है।
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Pages:30-31
How to cite this article:
डाॅ0 सुशील कुमार तिवारी "कालिदास के नाटको मे संवेदना और प्रेम". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 6, 2017, Pages 30-31
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