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VOL. 3, ISSUE 6 (2017)
तुलसी काव्य में दार्शनिक मूल्य
Authors
डाॅ0 अनुष्का तिवारी
Abstract
गोस्वमी तुलसीदास के दो प्रमुख ग्रंथ रामचरित मानस एवं विनय पत्रिका दार्शनिक चिन्तन पर आधारित प्रमुख ग्रंथ है। दर्शन का सात्वि अर्थ है देखना प्रायः सांसारिक मानव जागतिक पदार्थो, वस्तुओं, संबधों एवं सुख-दुख के स्थूल स्वरूपों को देखता है, और इस दृश्यमान जगत को ही सच्चा मान लेता है। दर्शन शब्द का तात्पर्य केवल जगत को देखना ही पूर्णतः सही नहीं है। दर्शन के अन्तरगत ‘‘सृष्टि से निर्माता को देखना’’ आत्मसात करना अनुभव में लाना एवं तद्विषयक चिन्तन करना दर्शन है। दर्शन शब्द का प्रयोग वर्तमान में किसी भी क्रमबद्ध सुव्यवस्थित विचार धारा को कहा जाने लगा है, भले ही वह अध्यात्मपरक दर्शन ना हो। जैसे राजनैतिक दर्शन, आर्थिक चिन्तन दर्शन, सामाजिक दर्शन इत्यादि। अब इन दोनों प्रयोगों को एक साथ जोड़कर देखें तो दर्शन विषयक परिभाषा इस प्रकार भी की जा सकती है। जिस ज्ञान का क्रमवत आद्योपान्त, कार्यकारण एवं परिणामपरक अध्ययन करके एक व्यवस्थित सिद्धान्त प्रतिपादित किया जाता है वह दर्शन है।
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Pages:37-39
How to cite this article:
डाॅ0 अनुष्का तिवारी "तुलसी काव्य में दार्शनिक मूल्य". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 6, 2017, Pages 37-39
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