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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 4, ISSUE 5 (2018)
हिन्दी में नाटक का स्थान
Authors
डाॅ0 अनिल कुमार
Abstract
हिन्दी में नाटक शब्द का जा अर्थ प्रयुक्त करते है। उसे संस्कृत काव्यशास्त्र में नाट्य, रूपक और रूप्य नामक शब्दों से लिया गया है। नट् धातु से नाटक शब्द का विकास हुआ है। नट् का अर्थ अभिनय और न्त्य दोनों से है, किन्तु आज के समय में इसका प्रयोग केवल अभिनय के अर्थ में होने लगा है। भरत मुनि के अनुसार समस्त संसार के भावों का अनुकरण करना ही नाट्य है। काव्य की भांति नाटक भी प्राचीन विद्या है। वैसे इसका विकास संस्कृत-परम्परा-साहित्य में हो चुका है। हिन्दी नाटक के प्रतिस्थापन में की रंगमंच एवं रेडियों-रूपक के प्रचलन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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Pages:09-10
How to cite this article:
डाॅ0 अनिल कुमार "हिन्दी में नाटक का स्थान". International Journal of Hindi Research, Vol 4, Issue 5, 2018, Pages 09-10
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