Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
एक लेखिका की संघर्ष गाथा: पिंजरे की मैना
Authors
मिथिलेश कुमारी
Abstract
आत्मकथा किसी एक व्यक्ति विशेष के समग्र जीवन की रचना अवश्य है परन्तु उस व्यक्ति के साथ जुड़े समाज, स्थान, वर्ग और जाति विशेष का परिचय भी हमें अवश्य मिलता है। किसी के जीवन की घटनाएँ और परिस्थितियाँ अलग-अलग हो सकती हैं, संघर्ष और वर्गीय चरित्र अलग हो सकते हैं परन्तु उसमें समाज के दर्शन अवश्य होते हैं। आत्मकथा में कल्पना, स्मृति और इतिहास होता है। जीवन के सुख-दुःख, संघर्षों के बीच जीते-जागते मनुष्य की प्रतिक्रिया और उसका वजूद होता है। मैंने इस लेख में चन्द्रकिरण सौनरेक्सा की आत्मकथा का विश्लेषण किया है। एक रचना को एक लेख में नहीं समेटा जा सकता। एक रचना के कई विस्तृत और व्यापक पहलू होते हैं लेकिन इस आत्मकथा के मूल तत्व को अवश्य यहाँ रेखांकित करने की कोशिश की गई है। इसके लिए रचना से कुछ सन्दर्भ भी दिए गए हैं। मैंने यहाँ आत्मकथा से सम्बंधित कई साहित्यकारों की परिभाषाओं को भी दिया। आत्मकथा क्या है और इसका स्वरुप क्या होता है, इस पर संक्षिप्त विचार किया है। इस शोध लेख में स्त्री जीवन की विडम्बनाओं से जुड़े पहलू सामने आये हैं।
Download
Pages:86-90
How to cite this article:
मिथिलेश कुमारी "एक लेखिका की संघर्ष गाथा: पिंजरे की मैना". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 86-90
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.