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VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
मोहन राकेश की कहानियों में स्त्री-पुरुष के बदलते संबंध
Authors
डॉ. एन. लावण्या
Abstract
स्त्री पुरुष के रिश्ते आज एक ऐसा ज्वलंत विमर्श बन गया है जिस पर कोई कुछ कहना या लिखना चाहता है ।स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सामाजिक संबंधों के इटने का जो दौर चला वह रूका नहीं और तेज होता गया । पति पत्नी का संबंध एक झटके से टूटने लगे । अब नारी चार दीवारी से मुक्त होकर स्वतंत्र हो गई है । अपने जीवन में नयी चेतना लाने तत्पर रही है । ख़ासकर मोहन राकेश की कहानियों में मध्यवर्गीय समाज की अतृप्तिए खोखलेपनए निराशा आदि अभिव्यक्त हुई है । राकेश अपनी कहानियों में प्रेमए साहचर्य भावना को व्यक्त करते है तो दूसरी ओर उनकी कहानियाँ व्यतीत कथा के निकट प्रतीत होती है और कुछ अत्याधुनिक की ओर। प्रस्तुत आलेख में कुछ ऐसे ही महत्त्वपूर्ण मुद्दों को रेखांखित करने का प्रयास किया गया है
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Pages:23-26
How to cite this article:
डॉ. एन. लावण्या "मोहन राकेश की कहानियों में स्त्री-पुरुष के बदलते संबंध". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 23-26
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