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VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
नारी चेतना: चुनौतियाँ और संभावनाएँ (भारतीय कथा साहित्य के सन्दर्भ में)
Authors
डॉ. सीमा शर्मा
Abstract
पितृसत्तात्मक समाज में नारी की स्थिति दोयम दर्जे की रही है। ऐसे समाज में नारी-स्वातंत्र्य, नारी अधिकार का प्रश्न कोई अर्थ नहीं रखता जब तक नारी स्वयं आत्मनिर्भर नहीं बनती। आत्मनिर्भर नारी ही समाज के दोहरे मापदंड से संघर्ष करके अपने स्वत्व की स्थापना कर सकती है। प्रस्तुत शोध लेख में भारतीय कथा साहित्य के माध्यम से नारी चेतना के इन्हीं आयामों की पड़ताल की गई है।
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Pages:68-71
How to cite this article:
डॉ. सीमा शर्मा "नारी चेतना: चुनौतियाँ और संभावनाएँ (भारतीय कथा साहित्य के सन्दर्भ में) ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 68-71
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