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VOL. 7, ISSUE 5 (2021)
महिला लेखन: चुनौतियाँ व संभावनाएँ
Authors
डॉ. योगेशभाई प्रतापसिंह झाला
Abstract
स्वातंत्र्योत्तर महिला लेखिकाओं ने युग के यथार्थ को, स्त्री पुरुषों के संबंधों में आए उतार-चढ़ाव को अपने लेखन में प्रस्तुत किया है। नारी-पुरुष के आपसी संबंधों में आई गिरावट, उनके दांपत्य जीवन की समस्याएं, पारिवारिक विघटन की स्थिति आदि का चित्रण उन्होंने किया है। अब वे वैवाहिक बंधन को लेकर स्वतंत्र निर्णय रखती है। वर्तमान महिला लेखिकाओं ने परंपरागत मूल्यों को नकार दिया है और नवीन जीवन मूल्यों को ढूंढने का प्रयास करती नजर आती है। वह पुरुष के संग अपने संबंधों के नए अर्थ खोज रही है। आज का महिला लेखन इन के अंतर्मन की अभिव्यक्ति है। आज स्त्री के चेहरे पर कोई नकाब नहीं है। उनका व्यक्तित्व यथार्थ बोध के साथ उपन्यासों में प्रतिबिंबित हो रहा है।
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Pages:39-42
How to cite this article:
डॉ. योगेशभाई प्रतापसिंह झाला "महिला लेखन: चुनौतियाँ व संभावनाएँ ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 5, 2021, Pages 39-42
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