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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
नाथ साहित्य का अनुशीलन
Authors
डॉ0 अनुपम मिश्र
Abstract
नाथ साहित्य हिन्दी साहित्य का अति महत्वपूर्ण अंग है। नाथ साहित्य के पुरस्कर्ता गोरखनाथ माने जाते हैं। नाथ साहित्य का आधार योगशास्त्र है। योगशास्त्र के द्वारा इंद्रिय निग्रह कर एक योगी या अवधूत पिण्ड में स्थित ब्रह्म का साक्षात्कार कर सकता है। नाथ साहित्य का उद्भव सिद्ध साहित्य से हुआ है, किन्तु नाथ साहित्य में वामाचार एवं नारी भोग का पूर्ण निषेध है और आचरण की शुद्धता पर बहुत अधिक जोर दिया गया है। संत साहित्य तथा कबीर पर नाथ साहित्य का प्रभाव बहुत अधिक पड़ा है।
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Pages:102-104
How to cite this article:
डॉ0 अनुपम मिश्र "नाथ साहित्य का अनुशीलन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 102-104
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