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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
बघेली गाथाओं में रंगमंचीय सम्भावनाएँ
Authors
अंकुश सिंह चौहान, डॉ. सुरेंद्र बहादुर सिंह चौहान
Abstract
प्रस्तुत शोध में बघेली लोक साहित्य की कोहरौहीं, बसदेवा, अहीर गाथाएँ, सूरगेनी, चंदनुआ, मदाइन गंगा, रेवा-परेवा, नल दमयंती, राजा हरिश्चन्द्र, चदैनी, रानी साहुरंगा, रानी केतकी, श्रवण कुमार, पदुम कंधइया, राजा कर्ण, बबी कुंतिमा, आदि गाथा-गायन परंपराओ का अध्ययन नाटकीय सम्भावनाओं और बघेली नाट्य शैली को गहरे जाँचने परखने और उसे बोली के रंगमंच मे नवाचार स्थापित करने की दृष्टि से किया जाना चाहिए। इस आलेख में बघेली के कुछ महत्वपूर्ण गाथा गायन परंपराओं में नाटकीय तत्वों की उपस्थिति के दृष्टिगत बघेली गाथाओं में रंगमंचीय संभावनाओं पर अध्ययन किया जाना है।
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Pages:12-13
How to cite this article:
अंकुश सिंह चौहान, डॉ. सुरेंद्र बहादुर सिंह चौहान "बघेली गाथाओं में रंगमंचीय सम्भावनाएँ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 12-13
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