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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
निर्मल वर्मा कि कहानियों में महानगरीय जीवन का तनाव
Authors
अमित, डॉ. कल्पना शर्मा
Abstract
हिंदी कथा साहित्य में निर्मल वर्मा का विशिष्ट स्थान है। उनकी कहानियाँ आधुनिक महानगरीय जीवन की जटिलताओं, मानवीय संबंधों के विघटन तथा व्यक्ति के आंतरिक मानसिक द्वंद्व का अत्यंत सूक्ष्म और संवेदनशील चित्रण प्रस्तुत करती हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य निर्मल वर्मा की चयनित कहानियों परिन्दे, पराये शहर में, धूप का एक टुकड़ा, जलती झाड़ी तथा लंदन की एक रात के आधार पर महानगरीय जीवन और उससे उत्पन्न तनाव का विश्लेषण करना है। अध्ययन गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है, जिसमें मूल कहानियों के साथ आलोचनात्मक स्रोतों का भी सहारा लिया गया है। शोध से स्पष्ट होता है कि निर्मल वर्मा के कथा-संसार में महानगर केवल भौगोलिक परिवेश नहीं, बल्कि एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जहाँ व्यक्ति भीड़ के बीच रहकर भी अकेलेपन, अजनबीपन, संवादहीनता, भावनात्मक रिक्तता तथा अस्तित्वगत संकट का अनुभव करता है। उनकी कहानियों के पात्र निरंतर आत्मसंघर्ष, पहचान के संकट और जीवन के अर्थ की खोज में दिखाई देते हैं। महानगरीय जीवन की प्रतिस्पर्धा, समयाभाव और संबंधों की औपचारिकता व्यक्ति के मानसिक तनाव को और अधिक तीव्र बना देती है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि निर्मल वर्मा ने आधुनिक शहरी जीवन की बाहरी चकाचौंध के पीछे छिपे मानवीय अकेलेपन, संबंधों के विघटन तथा मनोवैज्ञानिक तनाव को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। इस दृष्टि से उनकी कहानियाँ समकालीन समाज की जटिलताओं को समझने का महत्वपूर्ण साहित्यिक दस्तावेज़ सिद्ध होती हैं।
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Pages:121-124
How to cite this article:
अमित, डॉ. कल्पना शर्मा "निर्मल वर्मा कि कहानियों में महानगरीय जीवन का तनाव". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 121-124
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