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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
भारतीय एवं वैश्विक मजदूर आंदोलनों के इतिहास में महिला मज़दूरों की भूमिका, दोहरे शोषण का यथार्थ और ऐतिहासिक संघर्ष
Authors
ज्योति
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र मजदूर आंदोलनों के इतिहास लेखन में महिला श्रमिकों की उपेक्षित किंतु केंद्रीय भूमिका का ऐतिहासिक एवं सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। परंपरावादी इतिहास लेखन में मजदूर संघर्षों को मुख्यतः पुरुष श्रमिकों की परिपरिणामी गतिविधियों के रूप में देखा गया। किंतु वस्तुस्थिति यह है कि महिला श्रमिकों ने न केवल उत्पादन प्रक्रिया की नींव रखी, बल्कि आंदोलनों को संगठित करने, वैचारिक नेतृत्व देने तथा उन्हें लैंगिक व सामाजिक न्याय के व्यापक प्रश्नों से जोड़ने में भी निर्णायक भूमिका निभाई। यह शोध-पत्र महिला मज़दूरों के 'दोहरे शोषण'—पूँजीवादी व्यवस्था द्वारा आर्थिक शोषण तथा पितृसत्तात्मक समाज द्वारा लैंगिक भेदभाव—की अवधारणा की व्याख्या करता है। अध्ययन में भारत के ऐतिहासिक एवं समकालीन आंदोलनों (छत्तीसगढ़ खदान मजदूर आंदोलन, मुन्नार चाय बागान का 'पेम्बिलई ओरुमई', बेंगलुरु गारमेंट वर्कर्स आंदोलन तथा एनसीआर क्षेत्र के गारमेंट आंदोलनों) के साथ-साथ वैश्विक परिप्रेक्ष्य में औद्योगिक क्रांति, शिकागो के हेमार्केट आंदोलन, मई दिवस के इतिहास तथा 1917 की रूसी क्रांति में महिला श्रमिकों के योगदान की पड़ताल की गई है।
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Pages:164-169
How to cite this article:
ज्योति "भारतीय एवं वैश्विक मजदूर आंदोलनों के इतिहास में महिला मज़दूरों की भूमिका, दोहरे शोषण का यथार्थ और ऐतिहासिक संघर्ष". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 164-169

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भारतीय एवं वैश्विक मजदूर आंदोलनों के इतिहास में महिला मज़दूरों की भूमिका, दोहरे शोषण का यथार्थ और ऐतिहासिक संघर्ष | International Journal of Hindi Research